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दांत आने पर बचà¥â€à¤šà¤¾ चिड़चिड़ा हो सकता है, रो सकता है और उसे सोने में दिकà¥â€à¤•त हो सकती है। कà¥à¤› बचà¥â€à¤šà¥‹à¤‚ को दांत आने पर 101 डिगà¥à¤°à¥€ से कम बà¥à¤–ार चढ़ सकता है। अगर आपके बचà¥â€à¤šà¥‡ को 101 डिगà¥à¤°à¥€ से जà¥â€à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बà¥à¤–ार है, दसà¥â€à¤¤ हो रहे हैं या बहती नाक की पà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥â€à¤²à¤® हो रही है, तो यह दांत आने नहीं बलà¥à¤•ि वायरस के कारण हो सकता है।
घरेलू उपाय- शिशॠके दांत आने पर दरà¥à¤¦ और बà¥à¤–ार के लिठ(tips or home remedies to cure tooth fever)
1. गाजर (Carrot)
शिशॠके दांत आने पर अगर उसे बà¥à¤–ार हो, तो आप उसे गाजर खाने को दे सकते हैं। इसके लिठà¤à¤• पतले गाजर को अचà¥à¤›à¥€ तरह से धोकर छील लें। फिर बचà¥à¤šà¥‡ को खाने के लिठदें। इससे बचà¥à¤šà¥‡ की इमà¥à¤¯à¥‚निटी बढ़ती है और बà¥à¤–ार दूर होता है। आप चाहें तो इसके अलावा बचà¥à¤šà¥‡ को खीरे या सेब का टà¥à¤•ड़ा à¤à¥€ खाने को दे सकते हैं। इससे दांत निकलने वाले दरà¥à¤¦ में à¤à¥€ आराम मिलता है। इससे बचà¥à¤šà¥‡ के दांत à¤à¥€ हेलà¥à¤¦à¥€ होते हैं।
2. नारियल पानी (coconut water)
शिशॠके दूध के दांत निकलते समय उसे दसà¥à¤¤, बà¥à¤–ार जैसी समसà¥à¤¯à¤¾ होती है। इससे उसके शरीर में पानी की कमी होने लगती है। à¤à¤¸à¥‡ में आप उसे नारियल पानी पिला सकते हैं। नारियल पानी सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ होने के साथ ही पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ से à¤à¥€ à¤à¤°à¤ªà¥‚र होता है। नारियल पानी में गà¥à¤²à¥‚कोज, इलेकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿà¥à¤¸ (glucose, electrolytes) दोनों ततà¥à¤µ मौजूद होते हैं, जिससे बà¥à¤–ार कम होता है। इस पानी को बचà¥à¤šà¤¾ आसानी से पी सकता है।
3. पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ का सेवन करवाà¤à¤‚ (protein)
दांत के दौरान अगर बचà¥à¤šà¥‡ को बà¥à¤–ार हो, तो आप उसे पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ यà¥à¤•à¥à¤¤ आहार (protein rich diet) का सेवन करवा सकते हैं। इसके लिठआप उसे अंडा (egg) खिला सकते हैं। अंडे में काफी अचà¥à¤›à¥€ मातà¥à¤°à¤¾ में पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ होता है। इससे रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ (immunity) मजबूत बनती है। पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ सफेद रकà¥à¤¤ कोशिकाओं (white blood cells) को बढ़ाने में à¤à¥€ मदद करता है।
4. दलिया (Oatmeal)
छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को दलिया खिलाना बहà¥à¤¤ फायदेमंद होता है। इसका सेवन आप बचà¥à¤šà¥‡ को दूध में मिलाकर कर सकते हैं। दलिया को दूध में डालकर खिला सकते हैं। दलिया के सेवन से बचà¥à¤šà¥‡ को पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ समेत कई अनà¥à¤¯ पोषक ततà¥à¤µ मिलते हैं। आप चाहें तो बचà¥à¤šà¥‡ को दलिया की खिड़ची बनाकर à¤à¥€ खिला सकते हैं। दलिया की खिचड़ी सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठकाफी फायदेमंद होती है।
5. मूंग दाल की खिचड़ी (Moong Dal Khichdi)
छोटे बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठमूंग दाल की खिचड़ी बहà¥à¤¤ लाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• होती है। मूंग दाल पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ (Moong Dal Nutrients) से à¤à¤°à¤ªà¥‚र होता है। आप बचà¥à¤šà¥‡ को दोपहर या रात के समय मूंग दाल की खिचड़ी खिला सकते हैं। इससे बचà¥à¤šà¥‡ को विटामिंस और मिनरलà¥à¤¸ (Moong dal khichdi vitamins and minerals) मिलेंगे, जिससे उसकी रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ बढ़ेगी (moong daal khichdi boost immunity) और बà¥à¤–ार में आराम मिलेगा। मूंग की दाल पाचन में à¤à¥€ आसान होता है।
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